Tuesday, April 2, 2019

गूगल इंडिया के हेड राजन आनंदन का इस्तीफा, इस महीने के अंत में कंपनी छोड़ेंगे

बेंगलुरु. गूगल के साउथ ईस्ट एशिया और इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट राजन आनंदन ने इस्तीफा दे दिया है। वो इस महीने के अंत में कंपनी छोड़ देंगे। गूगल एशिया पैसिफिक के प्रेसिडेंट स्कॉट बेयोमॉन्ट ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

सिक्योइया कैपिटल से जुड़ेंगे राजन

गूगल छोड़ने के बाद राजन वेंचर फंड कंपनी सिक्योइया कैपिटल जॉइन करेंगे। इस फर्म के मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेन्द्र जे सिंह ने लिंक्ड-इन पोस्ट में कहा है कि राजन लीडरशिप टीम का हिस्सा बनेंगे। राजन का कई स्टार्पअप कंपनियों में निवेश भी है।

राजन 8 साल से गूगल में थे। इससे पहले 2010 तक वो माइक्रोसॉफ्ट के साथ जुड़े हुए थे। गूगल से उनके इस्तीफे की वजह पता नहीं चल पाई है। गूगल के कंट्री डायरेक्टर (सेल्स) विकास अग्निहोत्री, राजन की जगह गूगल इंडिया के अंतरिम हेड बनेंगे।

राजन डेल और मैकेंजी के साथ भी काम कर चुके हैं। 2017 में वो इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन चुने गए थे। 2016 में वो कैपिलरी टेक्नोलॉजीज के बोर्ड में शामिल हुए थे।

वॉशिंगटन. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा है कि भारतीय सैटेलाइट के नष्ट होने से 400 टुकड़े हुए। ये अंतरिक्ष की कक्षा में चक्कर लगा रहे हैं। इसके चलते इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) और उसमें रह रहे एस्ट्रोनॉट्स को खतरा पैदा हो गया है। भारतीय रक्षा अनुसंधान संस्थान (डीआरडीओ) ने 27 मार्च को एंटी-सैटेलाइट (ए-सैट) मिसाइल का टेस्ट किया था। इस दौरान 300 किलोमीटर दूर पृथ्वी की निचली कक्षा में लाइव सैटेलाइट को नष्ट करने में कामयाबी मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात की जानकारी दी थी।

'10 सेमी के 60 टुकड़े ट्रैक किए गए'
नासा प्रमुख जिम ब्राइडनस्टाइन अपने कर्मचारियों को संबोधित कर कर रहे थे। उन्होंने कहा, "हम भारतीय सैटेलाइट के टुकड़ों को ट्रैक करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अब तक हमने 10 सेमी या उससे बड़े 60 टुकड़ों को ट्रैक किया है।" यह सैटेलाइट आईएसएस से नीचे स्थित था।

ब्राइडनस्टाइन के मुताबिक, "24 टुकड़े आईएसएस के पास चक्कर लगा रहे हैं, यह खतरनाक साबित हो सकते हैं। चिंता की बात यह है कि सैटेलाइट नष्ट किए जाने के बाद मलबा आईएसएस के ऊपर पहुंच गया है। इस तरह की गतिविधियां भविष्य में मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए अच्छी साबित नहीं होंगी। यह हमें स्वीकार्य नहीं है। नासा का रुख इस मामले में काफी स्पष्ट है।"

वहीं, अमेरिकी सेना के मुताबिक- अब तक 10 सेमी से बड़े करीब 23 हजार टुकड़े ट्रैक किए गए हैं। ये टुकड़े मलबे के रूप में फैले हैं। इनमें 3 हजार टुकड़े 2007 में चीनी एंटी-सैटेलाइट टेस्ट में निकले थे।

नासा चीफ ने यह भी कहा कि आईएसएस से टुकड़ों के टकराने का खतरा 44% तक बढ़ चुका है। हालांकि यह खतरा समय के साथ कम हो जाएगा क्योंकि वायुमंडल में प्रवेश के साथ ही मलबा जल जाएगा।

Tuesday, March 26, 2019

सुषमा ने पाक से कहा- दोनों नाबालिग हिंदू बेटियां उनके परिवार को सौंपी जाएं

नई दिल्ली. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा है कि पाकिस्तान सरकार दो नाबालिग लड़कियों को फौरन उनके परिवार तक पहुंचाया जाए। होली के दिन सिंध प्रांत से इनका अपहरण कर जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया। इसके बाद इनका निकाह करा दिया गया था। भारत की ओर से यह मुद्दा उठाए जाने के बाद प्रधानमंत्री इमरान खान ने जांच के आदेश दिए थे। अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर भारत ने पाक को पत्र भी लिखा था।

सुषमा ने पूछा- क्या नाबालिग बेटियां शादी का फैसला ले सकती हैं?
सुषमा ने मंगलवार को ट्वीट किया, ''पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों का जबरन धर्म बदलवाया। उनकी उम्र को लेकर कोई विवाद नहीं है। रवीना 13 और रीना 15 साल की है। नए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री तक को यह नहीं लगता कि नाजुक उम्र की बेटियां क्या अपनी मर्जी से शादी, या धर्म बदलने का फैसला ले सकती हैं। हमारी सिर्फ एक मांग है कि लड़कियां परिवार को सौंपी जाएं।'' इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने सरकार को दोनों लड़कियों को सुरक्षित परिवार के पास पहुंचाने का आदेश दिया है।

अफसर समेत 7 लोग गिरफ्तार
अल्पसंख्यक समुदाय ने रविवार को कराची में प्रदर्शन किया था। इसके बाद सुषमा स्वराज ने पाक स्थित भारतीय उच्चायोग से मामले की जानकारी मांगी थी। पुलिस ने सोमवार को काजी समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है।

होली की शाम (21 मार्च) कुछ लोगों ने रवीना और रीना का उनके घर से अपहरण कर लिया था। दोनों बहनें सिंध प्रांत के घोटकी जिले की रहने वाली हैं। उनकी जबरन शादी कराने से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए थे। एक वीडियो में लड़की ने कहा था कि उसे जबरन इस्लाम कबूल कराया गया।

बीजिंग. चीन के कस्टम विभाग ने उन 30 हजार मानचित्रों को नष्ट कर दिया, जिनमें अरुणाचल प्रदेश और ताइवान को उनके कब्जे में नहीं दिखाया गया था। इन वैश्विक मानचित्रों की छपाई चीन में ही हुई थी। चीनी के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि सारे नक्शे किसी अज्ञात देश में भेजे जाने थे।

अरुणाचल को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा मानता है चीन
भारत के पूर्वोत्तर में स्थित अरुणाचल प्रदेश को चीन अपने कब्जे में बताता रहा है। उसका कहना है कि यह राज्य दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है। यहां तक कि उसे भारतीय राजनेताओं के इस प्रदेश में आने पर भी आपत्ति है। चीन ने दलाई लामा के अरुणाचल दौरे का विरोध किया था। दलाई के वहां जाने पर नौ जगहों के नाम बदल दिए थे।

अरुणाचल से सटी 3488 किमी लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर भारत-चीन के बीच लंबे अर्से से विवाद चल रहा है। दोनों देश इस मसले पर 21 दौर की वार्ता कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।

ताइवान को भी चीन अलग देश के तौर पर मान्यता नहीं देता। चीन, ताइवान को अपना हिस्सा मानता है। हालांकि, वैश्विक मंचों पर अपनी स्वायत्ता को लेकर ताइवान लगातार आवाज उठा रहा है। 

चाइना फॉरेन अफेयर्स यूनिवर्सिटी में इंटरनेशल लॉ के प्रोफेसर ली वेनजांग का कहना है कि नक्शे नष्ट करना सही कदम है। अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक ताइवान और दक्षिणी तिब्बत चीन के ही अभिन्न अंग हैं।

Wednesday, March 20, 2019

दक्षिणी अफ़्रीका: मोज़ाम्बिक, ज़िम्बॉब्वे और मलावी में ईडाय तूफ़ान से भारी तबाही, हज़ारों की मौत की आशंका

पिछले कुछ दिनों से दक्षिणी अफ़्रीका के तीन देशों में ऐसे ही भयानक मंज़र देखने को मिल रहे हैं. ये तीन देश हैं- मोज़ांबिक, ज़िम्बॉब्वे और मलावी.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि तूफ़ान ईडाय शायद दक्षिण अफ़्रीकी इलाकों में आई अब तक की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदा है.

एक वक़्त पर तो मोज़ाम्बिक के तक़रीबन 70 लाख लोग साइक्लोन ईडाय के सीधे संपर्क में थे. अकेले मलावी में 900 से ज़्यादा लोग इस तूफ़ान की चपेट में आ चुके हैं.

संयुक्त राष्ट्र से मिली जानकारी के मुताबिक़ तूफ़ान की वजह से छह मीटर तक गहरी बाढ़ भी आई है और इससे एक बड़े हिस्से में भारी विनाश है.

पूर्वी ज़िम्बाब्वे में मौजूद बीबीसी अफ़्रीका की संवाददाता शिंगाई न्योका ने कहा कि 'उन्होंने कभी इतनी बड़ी तबाही नहीं देखी.'

संयुक्त राष्ट्र के सहायता कर्मियों की आशंका है कि मोज़ाम्बिक का बूज़ी शहर पूरी तरह से डूब सकता है क्योंकि आने वाले कुछ घंटों में बाढ़ का पानी लगातार बढ़ेगा. तूफ़ान की वजह से ज़िम्बॉब्वे के पूर्वी हिस्से में भी भारी तबाही हुई है. वहीं, मलावी में लगभग 100 लोगों की मौत हो गई है.

बायरा शहर के नेल्सन मोआदा अपने परिवार के साथ बचकर इटली जाने में क़ामयाब रहे. उन्होंने रोम से बीबीसी से बात की और बताया कि उनके गृहनगर में कैसे हालात हैं:

उन्होंने कहा, "सारे स्कूल बर्बाद हो गए. बायरा का सेंट्रल हॉस्पिटल नष्ट हो गया है. आप जानते हैं कि मोज़ांबिक एक ग़रीब देश है. बायरा को एक-दो महीनों में वापस पहले जैसा नहीं बनाया जा सकता. हमें शहर को दोबारा खड़ा करने में महीने और साल लग जाएंगे. शहर पूरी तरह बर्बाद हो गया है. ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने पूरे शहर पर बम गिरा दिया हो."

मोज़ांबिक में तूफ़ान प्रभावित इलाके में किए गए एक हवाई सर्वेक्षण से पता चलता है कि तक़रीबन 50 किलोमीटर तक का हिस्सा पूरी तरह से पानी में डूबा हुआ है.

बीबीसी संवाददाता मिल्टन कोसी ने मोज़ांबिक की नेता, बाल और मानवाधिकार कार्यकर्ता ग्रेसा मशेल से बात की. बीबीसी संवाददाता ने उनसे सबसे पहला सवाल ज़मीनी हालात के बारे में पूछा:

ग्रेसा ने कहा, "आज बायरा, सोफ़ाला और मनीका की स्थिति साल 2000 में आई आपदा से भी बहुत ज़्यादा बुरी है. संपर्क और दूरसंचार के साधन पूरी तरह नष्ट हो गए हैं. लोग एक दूसरे से बात नहीं कर पा रहे है. अभी इस बारे में सही जानकारी नहीं है कि गांवों में कितने लोग फंसे हुए हैं, कितने लोग मौत से जूझ रहे हैं और कितने लोगों के घर बर्बाद हो गए हैं. इसलिए हालात बेहद गंभीर हैं. लोगों को हर छोटी-बड़ी चीज़ की ज़रूरत है फिर चाहे वो खाना हो, दवाएं हों या कपड़े. मैंने आज सुबह संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव अमीना मोहम्मद को फ़ोन किया और संयुक्त राष्ट्र से ख़ास तौर पर प्रशिक्षित टीम भेजने की अपील की है. हमारे लिए इस त्रासदी की असल गंभीरता और जटिलता जानना ज़रूरी है, जो हम अब तक नहीं जान पाए हैं."

ग्रेसा ने कहा, "इस आपदा से सिर्फ़ एक देश ही प्रभावित नहीं हुआ है. मुसीबत सिर्फ़ मोज़ांबिक पर नहीं बल्कि ज़िम्बॉब्वे और मलावी पर भी आई है. इसलिए हम तीनों देश मिलकर संयुक्त राष्ट्र से साझा अपील कर रहे हैं"

बीबीसी संवाददाता के ये पूछने पर कि क्या मोज़ांबिक सरकार ऐसी आपदाओं से निबटने में सक्षम है, ग्रेसा ने 'नहीं' में जवाब दिया.

उन्होंने कहा, "इस तरह के भयावह और जटिल संकट से निबटना एक अकेली सरकार के बस की बात नहीं है. हमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मदद चाहिए. मुझे मालूम है कि सरकार अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश कर रही है. राष्ट्रपति न्यूसी बायरा में कैबिनेट से मुलाकात कर रहे हैं ताकि आपदा का सही अंदाज़ा लगाया जा सके. "

इंटरनेशनल फ़ेडरेशन ऑफ़ रेड क्रॉस ने भी तूफ़ान से हुई तबाही को 'भयानक' बताया है. ब्रिटेन की सरकार ने मोज़ाम्बिक और मलावी को 80 लाख डॉलर की मानवीय मदद देने का ऐलान किया है.

वहीं, ज़िम्बॉब्वे में इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया गया है. राष्ट्रपति इमर्सन मंगाग्वा यूएई की यात्रा से बीच में ही लौट आए हैं.

Friday, March 8, 2019

सस्पेंस में दम, पर कमजोर है अमिताभ-तापसी की एक्टिंग

पिंक के बाद एक बार फिर बदला के जरिए अमिताभ बच्चन और तापसी पन्नू की जोड़ी आई है. बदला एक सस्पेंस थ्रिलर ड्रामा है. इस जॉनर में समय समय पर फिल्में बनती रही हैं. बींग साइरस, गुमनाम, गुप्त, बाजीगर, वो कौन थी, दृश्यम, कहानी और अंधाधुन जैसी फिल्मों की लिस्ट काफी लंबी है. बदला की कहानी में काफी मजबूत है और इसमें जबरदस्त सस्पेंस भी है. आइए जानते हैं कि कहानी और अंधाधुन जैसी फिल्मों के मुकाबले कैसी बन पड़ी है बदला.

क्या है फिल्म की कहानी:

फिल्म की कहानी नैना (तापसी पन्नू) की है. नैना एक यंग आंत्रप्रेन्योर है. शादीशुदा और एक बच्चे की मां है. हालांकि वो अर्जुन नाम के एक शादीशुदा शख्स के साथ एक्स्ट्रामैरिटल अफेयर में भी है. दोनों एक दूसरे के परिवार वालों से छिप कर पैरिस में मिलते हैं. इसी बीच कहीं जाने के दौरान रोड एक्सिडेंट में नैना की कार से, सनी नाम के एक लड़के की मौत हो जाती है. जिसके बाद दोनों सनी की मौत का सबूत मिटाते हैं. लेकिन सनी की मौत को लेकर कोई दोनों को ब्लैकमेल करता है. पैसे की मांग करता है. दोनों ब्लैकमेलर को रकम देने एक होटल में पहुंचते हैं, यहीं से शुरू होता है कहानी में ट्विस्ट.

दरअसल, होटल में अर्जुन की मौत हो जाती है और इल्जाम नैना पर लगता है. अमृता सिंह ने सनी की मां का रोल निभाया है. अमिताभ बच्चन प्रॉसिक्यूटर के रोल में हैं, वो नैना का केस टैकल करने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं. अब फिल्म की कहानी का तानाबाना कुछ सवालों में बुनने की कोशिश हुई है. जैसे अर्जुन की अचानक मौत कैसे हुई?  पैसे की मांग करने वाला होटल के रूम पर आता है, मगर पैसे लिए बिना क्यों चला जाता है? अमिताभ का किरदार क्या है? ब्लैकमेलर कौन है? अर्जुन की हत्या किसने की? ऐसे तमाम सवाल जानने के लिए फिल्म देखना होगा. वैसे इसमें सस्पेंस अर्जुन की हत्या से अलग वो चीज है जो फिल्म के टाइटल से जुड़ी हुई है. इंटरवल तक फिल्म में जबरदस्त सस्पेंस है.

क्यों देखें-

फिल्म की कहानी मजबूत है. शुरू से लेकर अंत तक सस्पेंस बनाए रखा गया है. किरदारों को किस समय पर कैसे फिल्म में पेश करना है इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया है. कहानी जिस तरह की है, उसे फिल्माना चुनौतीपूर्ण काम होता है. लेकिन इसके लिए निर्देशन और सम्पादन की तारीफ़ की जानी चाहिए. चूंकि फिल्म तमाम सवालों के जरिए बुनी गई है, इस वजह से एक सवाल का जवाब मिलने पर अगला सवाल फिल्म में दिलचस्पी बनाए रखता है. सीन्स अच्छे बन पड़े हैं. बदला की सबसे अच्छी बात यही है कि ये बोर नहीं करती और अंत तक दिलचस्पी बनाए रखती है.

हालांकि इस फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि कलाकारों का अभिनय बहुत उम्दा नजर नहीं आता. हो सकता है कि कहानी में नाटकीयता बहुत कम होने की वजह से ऐसा है. बदला को अमिताभ बच्चन या तापसी पन्नू की बहुत बेहतरीन एक्टिंग के लिए याद नहीं किया जाएगा. अमृता सिंह या दूसरे कलाकारों के काम अपनी जगह ठीक ठाक कहे जा सकते हैं.

फिल्म के कुछ आउटडोर लोकेशन प्रभावी हैं. सस्पेंस थ्रिलर ड्रामा में लाइट्स का बहुत योगदान होता है. बदला में कैमरा और रोशनी का अच्छा इस्तेमाल किया गया है.

क्यों ना देखें-

ज्यादा घुमावदार फिल्में देखने के आदी नहीं हैं तो ये फिल्म आपके लिए नहीं है. फिल्म के डायलॉग्स पर ज्यादा काम नहीं किया गया है. फिल्म की कहानी चाहें जितनी शानदार हो, बेहतरीन तरीके से इसे फिल्माया गया हो मगर कोई भी फिल्म दर्शकों के दिल में सिर्फ अच्छे डायलॉग्स की वजह से ही पहुंच सकती है. फिल्म में गाने नहीं हैं. बैकग्राउंड स्कोर भी मूड के हिसाब से सही कहा जा सकता है.

Wednesday, February 27, 2019

कश्मीर के बडगाम में वायुसेना का चॉपर MI-17V5 क्रैश, पायलट शहीद

जम्मू कश्मीर के बडगाम से सात किलोमीटर दूर गारेंद गांव में एक चॉपर MI-17V5  क्रैश हो गया. चॉपर खेत में जाकर गिरा और इसमें आग लग गई. हादसे की वजह अब तक साफ़ नहीं हो पाई है. हादसे में दोनों पायलट शहीद हो गए. इस चॉपर ने श्रीनगर एयरबेस से उड़ान भरी थी. सूत्रों का कहना है कि कश्मीर में चॉपर पेट्रोलिंग पर था तभी क्रैश हो गया.

बडगाम पुलिस का कहना है कि जिस जगह चॉपर क्रैश हुआ है वहां दो शव मिले हैं. मौके पर वायुसेना की टीम जांच कर रही है और पता किया जा रहा है कि चॉपर कैसे क्रैश हुआ.

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि विमान नीचे की ओर आने लगा और थोड़ी देर बाद जोरदार आवाज आई और विमान क्रैश हो गया. इसमें आग लग गई. मौके पर पुलिस और बचाव दल पहुंच गया है.

मालूम हो कि यह घटना ऐसे वक्त हुई है जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का माहौल है. बता दें कि बीते 20 दिनों में भारत के 5 विमान क्रैश हुए हैं. हाल ही में बेंगलुरु में एयरो शो के दौरान दो सूर्य किरण विमान आपस में टकराकर क्रैश हो गए थे.

इसके पहले राजस्थान में क्रैश हुआ था मिग...

गौरतलब है कि बडगाम के पहले राजस्थान के पोखरण में मिग-27 लड़ाकू विमान भी क्रैश हो गया था. उस वक्त यह विमान प्रशिक्षण उड़ान पर था और जैसलमेर से उड़ा था. हालांकि, इस हादसे में पायलट सुरक्षित रूप से विमान से बाहर निकलने में कामयाब रहे थे.

सुषमा ने मंगलवार तड़के भारत के द्वारा की गई एयरस्ट्राइक की जानकारी रूस और चीन के विदेश मंत्रियों को दी. उन्होंने बताया कि पुख्ता इनपुट मिलने के बाद भारत की वायुसेना ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी अड्डों के खिलाफ कार्रवाई की, इसमें कई आतंकवादी मारे गए हैं.

आपको बता दें कि चीन और पाकिस्तान की दोस्ती बीते कुछ समय में मजबूत हुई है. ऐसे में चीन को इस विषय पर भी साधना काफी अहम हो जाता है. जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने की भारत की राह में चीन की सबसे बड़ा रोड़ा है.

UNSC की बैठक में चीन कई बार अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल कर मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित होने से बचा चुका है. हाल ही में जब पुलवामा आतंकी हमले को लेकर UNSC की बैठक में निंदा प्रस्ताव लाने की बात हुई, तो चीन ने इसमें मसूद अजहर का नाम आने का विरोध किया. काफी मशक्कत के बाद चीन जैश-ए-मोहम्मद का नाम लेने पर राजी हुआ था.

Thursday, February 21, 2019

पुलवामा में मारे गए सैनिकों के शव के पास बैठ मुस्कुरा रहे थे आदित्यनाथ योगी?

कुछ लोगों का दावा: 'जब पूरा देश पुलवामा के चरमपंथी हमले में मारे गए जवानों का शोक मना रहा था, उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी तिरंगे में लिपटे शवों के पास बैठकर मुस्कुरा रहे थे'.

इस दावे के साथ सीएम योगी, बीजेपी नेता मोहसिन रज़ा, बिहार के गवर्नर लाल जी टंडन और यूपी के कैबिनेट मंत्री आशुतोष टंडन का 30 सेकेंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफ़ी शेयर किया जा रहा है.

फ़ेसबुक और ट्विटर पर इस वीडियो को सैकड़ों बार शेयर किया जा चुका है. इसे शेयर करने वालों का एक ही मक़सद है- 'ये दिखाना कि बीजेपी नेता कितने असंवेदनशील हैं'.

यू-ट्यूब और कई चैटिंग ऐप्स पर भी 14 फ़रवरी के पुलवामा हादसे से जोड़कर आदित्यनाथ योगी का ये वीडियो शेयर किया जा रहा है.

भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में हुए चरमपंथी हमले में 45 से ज़्यादा जवान मारे गए थे और कई अन्य जवान घायल हो गए थे.

लेकिन अपनी पड़ताल में हमने पाया कि जिस वीडियो के आधार पर बीजेपी नेताओं के इस घटना के प्रति गंभीर न होने की बात की जा रही है, वो पुराना है और पुलवामा हमले से उसका वास्ता नहीं है.

आदित्यनाथ योगी और अन्य बीजेपी नेताओं के मुस्कुराने का ये वीडियो पिछले साल का है, जब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री एनडी तिवारी का अंतिम संस्कार हुआ था.

कद्दावर नेता एनडी तिवारी का देहांत 18 अक्तूबर 2018 को दिल्ली में हुआ था. वो 93 वर्ष के थे.

एनडी तिवारी के अंतिम संस्कार में यूपी के सीएम आदित्यनाथ योगी बीजेपी नेता मोहसिन रज़ा से ऐसी क्या बात कह रहे थे कि चारों नेता पार्थिव शरीर के पास बैठे खिलखिला उठे, इसकी जानकारी तो सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं है. लेकिन बीजेपी और उनके नेताओं की इस हरक़त पर पार्टी की काफ़ी किरकिरी हुई थी.

ये वीडियो साल 2018 में भी वायरल हुआ था और लोगों ने आदित्नाथ योगी की भावभँगिमा की आलोचना की थी.

जिस तरह पाकिस्तानी अपने मुल्क को देखते हैं, ज़रूरी तो नहीं कि बाक़ी दुनिया भी पाकिस्तान को वैसे ही देखे. इसी तरह जैसे हिन्दुस्तानी भारत को देखते हैं, ज़रूरी तो नहीं कि विदेशी भी भारत को इसी दृष्टि से देखें.

जनता की भावनाएं, मीडिया के एक्शन से भरपूर मांगें, नेताओं के मुंह से निकलने वाले झाग अपनी जगह, मगर सरकारों को किसी भी एक्शन या रिएक्शन से पहले दस तरह की और चीज़ें भी सोचनी पड़ती हैं.

अब पुलवामा के घातक हमले को ही ले लें. या इससे पहले पठानकोट और उड़ी की घटना या 2008 के मुंबई हमले या 1993 के मुंबई में दर्जन भर बम विस्फोटों से फैली बर्बादी. सबूत, ताना-बाना और ग़ुस्सा अपनी-अपनी जगह मगर इसके बाद क्या?

युद्ध होना होता तो 13 दिसंबर 2001 को हो जाना चाहिए था जब लोकसभा बिल्डिंग पर चरमपंथी हमला हुआ था.

दो दिन बाद रक्षा मंत्रालय की तरफ़ से सेना को मार्चिंग ऑर्डर मिल चुके थे. 1971 के बांग्लादेश युद्ध के बाद पाकिस्तान से मिली सीमा पर भारतीय सेना की ये सबसे बड़ी तैनाती थी.

दोनों तरफ़ की फ़ौजें पंजाब से गुजरात तक एक दूसरे के दीदों में दीदें डाली घूरती रहीं और फिर 8000 करोड़ रुपये ख़र्च करने के बाद सेना डेढ़ वर्ष के बाद अगले मोर्चों से वापिस.

और इसके बाद आगरा में मुशर्रफ़-वाजपेयी मुलाक़ात, मगर नतीजा आज तक - ढाक के वही तीन पात.

इस बार भी जब तक ग़ुस्सा ठंडा नहीं हो जाता तब तक चाहें तो सेना को एड़ियों पर खड़ा रखें. चुनाव में पुलवामा को मुद्दे के तौर पर पूरी तरीक़े से सब पार्टियां इस्तेमाल करें.

दोनों देश इस्लामाबाद और दिल्ली से लंबे समय के लिए राजदूत बुलवा लें. आर्थिक व सांस्कृतिक दौरे और तबादले रोक दें. एक-दूसरे के ख़िलाफ़ गुप्त कार्रवाईयां और तेज़ कर दें, मगर फिर- इसके बाद?

चीन हो या रूस या अमरीका या सऊदी अरब या यूरोपीय यूनियन- हर कोई बाक़ी संसार और उसकी मुश्किलों को अपने-अपने हिसाब से देखता है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोस्ती भी मोल-तोल में होती है और दुश्मनी भी गणित के हिसाब से होती है.

इस वक़्त अगर इलाक़े में अफ़ग़ानिस्तान को सुलटाने के लिए अमरीका को पाकिस्तान की ज़रूरत न होती तो अब तक ट्रंप साहब पुलवामा पर कम से कम पांच ट्वीट कर चुके होते.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ये मामला उठाया ज़रूर जा सकता है मगर चीन वीटो कर देगा. सऊदी अरब को जितनी भारत की ज़रूरत है उससे ज़्यादा सऊदी अरब को पाकिस्तान की.

ईरान और भारत मिलकर पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कोई मोर्चा बना लें ऐसा नज़र नहीं आता.

क्या भारत को पाकिस्तान पर हमला कर देना चाहिए? दिल भले चाह रहा हो पर फ़िलहाल हालात इस क़ाबिल नहीं.

लेकिन, पुलवामा में जो बारूद इस्तेमाल हुआ वो सीमा पार से स्मगल हुआ? जिसने गाड़ी टकराई वो सीमा पार से आया? उसका हैंडलर लोकल था या सीमा की दूसरी तरफ़ बैठा था?

क्या कश्मीर में मिलिटेन्सी आज भी बाहर से कंट्रोल होती है या अब उसका अंदरूनी ढांचा बन चुका है?

और दहश्तगर्दी की भट्टी में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल बलूचिस्तान से कश्मीर तक मुसलसल क्यों पैदा हो रहा है?

Sunday, January 27, 2019

जोकोविच ने नडाल को हराकर जीता ऑस्ट्रेलियन ओपन का ख़िताब

नोवाक जोकोविच ने ऑस्ट्रेलियन ओपन का ख़िताब रिकॉर्ड सातवीं बार जीत लिया है.

उन्होंने फ़ाइनल मुक़ाबले में रफ़ायल नडाल को सीधे सेटों में 6-3,6-2, 6-3 से हराया.

पहले उम्मीद की जा रही थी कि दोनों के बीच 2012 के एपिक फ़ाइनल की तरह एक ज़ोरदार मुक़ाबला देखने को मिलेगा लेकिन नडाल ने महज दो घंटे चार मिनट में मुक़ाबला अपने नाम कर लिया.

2012 में दोनों के बीच मुक़ाबला पांच घंटे 53 मिनट तक चला था, जिसमें बाज़ी जोकोविच के ही नाम रही थी.

वर्ल्ड नंबर एक नोवाक जोकोविच के सामने शुरुआत से ही रफ़ायल नडाल फीके नज़र आए. पूरे मैच के दौरान जोकोविच ने 34 विनर लगाए और उन्होंने केवल नौ अनफोर्स्ड एरर किए जबकि नडाल ने पूरे मैच के दौरान 28 अनफोर्स्ड एरर किए.

ये नडाल के करियर का कुल 15वां ग्रैंड स्लैम ख़िताब है. ऑल टाइम लिस्ट में जोकोविच अब पीट संप्रास के 14 ग्रैंड स्लैम से आगे निकल चुके हैं.

जबकि कुल ग्रैंड स्लैम हासिल करने में वे अब नडाल से दो क़दम पीछे हैं और रॉजर फ़ेडरर से पांच क़दम पीछे हैं.

जनवरी का दिन था. अचानक बहुत ज़ोर से धरती हिली थी और दफ़्तर के सारे लोग सीढ़ियों से भागते हुए सड़क पर आ गए थे. एक अकेले कमलेश्वर थे जो हाथ में 'डनहिल' की सिगरेट लिए, कश लगाते वहीं 'पैंट्री' में खड़े रह गए थे.

मेरी तरफ़ देख कर बिना किसी घबराहट के बोले थे, 'बैठिए यहाँ कुछ नहीं होगा.'

उनसे दूसरी मुलाक़ात शायद दो साल बाद फिर बीबीसी स्टूडियो में हुई थी और मैंने उनसे पूछा था, 'आप कई शहरों में रहे हैं, मैनपुरी, इलाहाबाद, मुंबई और दिल्ली...इनमें से किस शहर को अपने सबसे नज़दीक पाते हैं?'

कमलेश्वर ने मुस्कराते हुए जवाब दिया था, 'इनमें से कोई ऐसा शहर नहीं हैं, जिसे मैं भूल सकूं. मेरी बहुत ख़ूबसूरत यादें मैनपुरी की है. एक हमारे यहाँ ईशान नदी हुआ करती थी, जिसे लोग 'ईसन' कहते थे. उसके किनारे घूमने जाना, शैतानियाँ करना, जंगलों में चले जाना, वहाँ से बेर तोड़ना, आम तोड़ना, खेतों से सब्ज़ियों की चोरी करना... ये सब चलता था और बहुत आनंद आता था.'

'सबसे बड़ी चीज़ थी कि मैनपुरी में ही मेरा पहला इश्क हुआ था. इश्क के बारे में कुछ मालूम तो था नहीं. कोई अच्छा लगने लगा तो इश्क हो गया. एक बंधी बंधाई रवायत सी थी कि मेरे और उसके बीच में बहुत ही घटिया समाज बीच में आ रहा था. उससे कहने की हिम्मत ही नहीं होती थी. न उसकी हिम्मत होती थी कि भर-आँख मुझे देख ले. ये समझ लीजिए कि करीब ढाई तीन फ़र्लांग से ये इश्क चला करता था.'

'जब उसकी शादी होने लगी तब मामला थोड़ा गंभीर हो गया. उस वक्त महसूस किया कि कुछ खो रहा है. उस ज़माने में मेरे बाल बहुत बड़े होते थे जो माँ को पसंद नहीं थे. उसकी शादी में जाना था लेकिन मन भीतर से रो रहा था. माँ ने घर पर नाई बुलवा कर बाल इतने छोटे करवा दिए जैसे आर्मी वालों के होते हैं. फिर मैं उस शादी में गया ही नहीं.'